
हरिद्वार के प्रमोटी आईपीएस,एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल द्वारा संपत्ति संबंधी अनियमितताओं का मामला,किसानों के लिए ‘चमत्कारी’ कृषि तकनीक का दावा!
हरिद्वार उत्तराखंड से राजेश कुमार यादव की खास रिपोर्ट

हरिद्वार में तैनात प्रमोटी आईपीएस एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल तथा उनकी पत्नी आईपीएस सरिता डोभाल के संबंध में गंभीर आरोप सामने आए हैं।12 फरवरी 2024 को भोपाल पानी (देहरादून क्षेत्र) में उनकी नाबालिग पुत्री के नाम पर 190 वर्ग मीटर का प्लॉट उपहार स्वरूप स्वीकार किया गया। यह संपत्ति लेन-देन उनके व्यक्तिगत संपत्ति रिटर्न (आईपी आर)में घोषित नहीं किया गया,न ही उनकी पत्नी आईपीएस सरिता डोबाल के आईपीआर में इसका उल्लेख है। यह कदम लोक सेवा (आचरण) नियमों एवं आईपीएस अधिकारियों द्वारा अनिवार्य संपत्ति घोषणा के प्रावधानों का उल्लंघन प्रतीत होता है।इसके अतिरिक्त,आईपीएस सरिता डोभाल ने अपनी वार्षिक कृषि आय 6,00,000 रुपये(18 बीघा भूमि से) घोषित की है,जबकि उनके पति प्रमेंद्र डोबाल ने 2.5 लाख रुपये प्रति वर्ष (8 बीघा भूमि से) की कृषि आय दिखाई है। यह प्रति बीघा लगभग 33,000 रुपये प्रति वर्ष की आय दर्शाता है,जो वर्तमान कृषि परिस्थितियों में अत्यंत असामान्य एवं अवास्तविक प्रतीत होती है।ऐसी ‘उन्नत कृषि तकनीक’ यदि वास्तव में मौजूद है, तो इसे केंद्रीय कृषि मंत्रालय तथा उत्तराखंड कृषि मंत्रालय के साथ साझा किया जाना चाहिए। इससे देश भर के किसानों को लाभ मिल सकता है,उनकी आय में वृद्धि हो सकती है तथा वे बिना प्रत्यक्ष रूप से खेती में संलग्न हुए प्रति बीघा लगभग 33,000 रुपये वार्षिक आय प्राप्त कर सकेंगे। आईपीएस प्रमेंद्र डोभाल (एसएसपी, हरिद्वार) एवं आईपीएस सरिता डोभाल जैसी सेवारत अधिकारी यदि ऐसी तकनीक से अवगत हैं,तो इसका राष्ट्रीय स्तर पर प्रसार अत्यंत लाभदायक होगा।जनता एवं मीडिया से अनुरोध है कि इस मामले की स्वतंत्र जांच करवाने हेतु संबंधित प्राधिकारियों (जैसे सतर्कता विभाग, केंद्रीय सतर्कता आयोग अथवा उत्तराखंड सरकार) का ध्यान आकर्षित करें, ताकि पारदर्शिता बनी रहे तथा किसानों के हित में कोई उपयोगी जानकारी छिपी न रहे।

